
शनि यंत्र (Saturn Yantra)
शनि यंत्र
- शनि यंत्र को तांबे, लोहे, या काले कागज पर अंकित करें।
- इसे शनिवार के दिन प्रातः शुभ मुहूर्त में स्थापित करें।
- यंत्र को गंगाजल और सरसों के तेल से शुद्ध करें।
- यंत्र के पास काले तिल, तेल का दीपक, और नीले या काले फूल अर्पित करें।
शनि के मंत्र और उनके अर्थ
1. बीज मंत्र
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।
अर्थ:
शनि देव की कृपा और उनके अनुशासन और न्याय की शक्ति का आह्वान करने वाला मंत्र।
2. गायत्री मंत्र
ॐ शनैश्चराय विद्महे छायानन्दनाय धीमहि। तन्नः शनि प्रचोदयात्।
अर्थ:
हम छाया पुत्र शनैश्चर का ध्यान करते हैं। वे हमें न्याय और अनुशासन का आशीर्वाद दें।
3. नवग्रह शनि मंत्र
ॐ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामार्तण्डसंभूतं तं नमामि शनैश्चरम्।
अर्थ:
जो नीलमणि के समान चमकते हैं, सूर्य पुत्र हैं, और छाया देवी के गर्भ से उत्पन्न हुए हैं, उन शनि देव को नमन।
4. सामान्य शनि मंत्र
ॐ शनैश्चराय नमः।
अर्थ:
शनि देव के प्रति कृतज्ञता और उनकी कृपा का आह्वान।
रत्न धारण करने के उपाय
नीलम (Blue Sapphire):
- धारण विधि:
- नीलम को चांदी या लोहे की अंगूठी में जड़वाएं।
- शनिवार को शनि होरा के समय इसे दाहिने हाथ की मध्यमा (मिडल फिंगर) में पहनें।
- पहनने से पहले गंगाजल, कच्चे दूध, और सरसों के तेल से शुद्ध करें।
- पहनते समय
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।मंत्र का 108 बार जाप करें।
शनि को प्रसन्न करने के लिए दान
1. दान के सामान:
- काले तिल
- लोहे के बर्तन
- काला कपड़ा
- सरसों का तेल
- उड़द की दाल
- नीलम रत्न (यदि संभव हो)
2. दान का दिन:
- शनिवार के दिन प्रातःकाल।
3. दान के स्थान:
- शनि मंदिर, गौशाला, या गरीबों को।
अन्य उपाय
- शनि की पूजा:
- शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें।
- शनि मंदिर में सरसों का तेल और काले तिल अर्पित करें।
- व्रत और साधना:
- शनिवार को व्रत रखें और शनि मंत्र का जाप करें।
- गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करें।
इन उपायों से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है, जो जीवन में अनुशासन, स्थिरता, और न्याय को बढ़ावा देता है।