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पंचांग में करण क्या है? (What is Karan in Panchang?)

पंचांग में करण क्या है? (What is Karan in Panchang?)

करण (Karan):
पंचांग के पांच अंगों में से एक है। यह तिथि का आधा भाग होता है। प्रत्येक तिथि में दो करण होते हैं। कुल 11 करण होते हैं, जिनमें से 4 स्थिर (नित्य) और 7 चल (चर) होते हैं।

करण के प्रकार:

  1. नित्य (स्थिर) करण:
    ये हमेशा एक ही स्थिति में रहते हैं:
    • शकुनी ♟️
    • चतुष्पद 🐄
    • नाग 🐍
    • किंस्तुघ्न 🕉️
  2. चर (चल) करण:
    ये सूर्य और चंद्रमा की गति के अनुसार बदलते हैं:
    • बव 🌀
    • बालव 🌿
    • कौलव 🏔️
    • तैतिल 🐦
    • गर 🌸
    • वणिज ⚖️
    • विष्टि (भद्र) ⚠️

भद्रा (Bhadra):

भद्रा करण:
भद्रा करण का विशेष महत्व है। यह विष्टि करण के दौरान उत्पन्न होती है।

  • भद्रा को शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है। यह संघर्ष और बाधाओं का प्रतीक होती है।
  • भद्रा के दौरान विवाह, नया कार्य, गृह प्रवेश, या अन्य शुभ कार्य नहीं करने चाहिए।

भद्रा के प्रतीकात्मक संकेत:

  • भद्रा का चिह्न: ⚠️
  • शुभ-अशुभ प्रभाव:
    • शुभ कार्य में बाधा 🛑
    • विवाद और दुर्घटना का संकेत ⚡

भद्रा का स्थान:

भद्रा कभी पृथ्वी लोक, कभी स्वर्ग लोक, और कभी पाताल लोक में रहती है।

  • पृथ्वी लोक में: शुभ कार्य पूरी तरह वर्जित। 🌏
  • स्वर्ग लोक में: अशुभता कम। ☁️
  • पाताल लोक में: प्रभाव मध्यम। 🌊

करण और भद्रा का महत्व:

  • मुहूर्त निर्धारण: शुभ मुहूर्त में भद्रा नहीं होनी चाहिए।
  • करण का चयन: चल करण शुभता के लिए उपयोगी होते हैं।

सुझाव:

पंचांग देखकर भद्रा और करण की जानकारी लें और शुभ कार्य के लिए सही समय चुनें। ⏳📜

📜 भगवान दास शर्मा
🎓 B.Sc (दिल्ली विश्वविद्यालय)
🔮 ज्योतिषाचार्य (भारतीय विद्या भवन)
📞 +91-9899768833